Virat Kohli: "मै इसे अपने मां के पास गुडगाँव भेज देता हूँ...", विराट कोहली ने प्लेयर ऑफ़ मैच जीतते ही खोला बड़ा राज
Virat Kohli: "मै इसे अपने मां के पास गुडगाँव भेज देता हूँ...", विराट कोहली ने प्लेयर ऑफ़ मैच जीतते ही खोला बड़ा राज

Virat Kohli: न्यूजीलैंड के खिलाफ भारतीय टीम के तरफ से विराट कोहली ने एक बार फिर अपने प्रचंड फॉर्म को दिखाया है. वह इस मैच में भी सबसे हाईएस्ट स्कोरर रहे. हालाँकि वह शतक के नजदीक पहुँच कर भी शतक से चूक गये. रोहित के जल्दी आउट होने के बाद विराट कोहली (Virat Kohli) ने जबरदस्त प्रदर्शन किया. और मैच को आसानी से जीत के तरफ ले जा रहे थे. विराट कोहली (Virat Kohli) ने बेहतरीन प्रदर्शन कर 93 रन की पारी खेली. हालाँकि मैच में आखिरी समय में केएल राहुल और हर्षित राणा ने बेहतरीन पारी खेली. इस मैच में भारतीय टीम के लिए जीत में अहम् रोल निभाया . और उनको प्लेयर ऑफ़ मैच चुना गया.

“मै इसे अपने मां के पास गुडगाँव भेज देता हूँ…”, Virat Kohli ने क्यों कहा ऐसा

भारतीय टीम के लिए जबरदस्त बल्लेबाजी कर रहे विराट कोहली (Virat Kohli) जब प्लेयर ऑफ़ मैच का अवार्ड लिया. तब उन्होंने के बड़ा खुलासा कर दिया. हर्षा भोगले ने पुछा आपके पास अब तक कितने यह अवार्ड जीत लिए है. इस पर विराट कोहली ने बताते हुए कहा कहा कि,

” सच कहूँ तो मुझे कोई अंदाज़ा नहीं है. मैं बस ट्रॉफियाँ गुड़गांव में अपनी माँ को भेज देता हूँ – उन्हें इन्हें संभालकर रखना बहुत अच्छा लगता है. (अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में दूसरे सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी होने के बारे मेंउन्होंने कहा कि अगर मैं अपने पूरे सफर पर नज़र डालूँ तो यह मेरे लिए किसी सपने के सच होने से कम नहीं है. मुझे हमेशा से अपनी क्षमताओं का पता था, लेकिन मैं यह भी जानता था कि आज मैं जहाँ हूँ वहाँ पहुँचने के लिए मुझे बहुत मेहनत करनी होगी. भगवान ने मुझे मेरी उम्मीद से कहीं ज़्यादा दिया है, मैं अपने सफर को बहुत ही विनम्रता और कृतज्ञता के साथ देखता हूँ, और मुझे इस पर बहुत गर्व है.”

विराट कोहली (Virat Kohli) से जब उनके शतक चूकने पर क्या पछतावा है पुछा गया, तो उन्होंने जवाब दिया और कहा कि,

“अगर मैं बिल्कुल सच कहूँ तो जिस तरह से मैं अभी खेल रहा हूँ, मैं उपलब्धियों के बारे में बिल्कुल नहीं सोच रहा हूँ. अगर हम पहले बल्लेबाजी कर रहे होते, तो शायद मैं और ज़ोरदार शॉट लगाता. लेकिन लक्ष्य का पीछा करते हुए, जब स्कोर बोर्ड पर था, तो मुझे स्थिति के अनुसार खेलना पड़ा. मुझे और चौके लगाने का मन कर रहा था, लेकिन अनुभव काम आता है. मेरे दिमाग में बस एक ही बात थी कि टीम को ऐसी स्थिति में पहुँचाऊँ जहाँ हम आसानी से जीत सकें.”

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