रोहित शर्मा ने तोड़ी चुप्पी, संन्यास पर पहली बार खुलकर दिया बयान, बताया कब लेंगे संन्यास
रोहित शर्मा ने तोड़ी चुप्पी, संन्यास पर पहली बार खुलकर दिया बयान, बताया कब लेंगे संन्यास

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान रोहित शर्मा ने इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे वनडे में लॉर्ड्स के एतिहासिक मैदान पर शानदार शतक जड़कर अपनी फॉर्म का सबूत दिया है. 39 वर्षीय रोहित ने 110 गेंदों में 138 रनों की पारी खेली, जिसमें 17 चौके और 5 छक्के शामिल थे. यह न केवल उनका 34वां वनडे शतक था, बल्कि लॉर्ड्स पर किसी भारतीय बल्लेबाज द्वारा वनडे में पहला शतक भी था. यह शतक बहुत ही दबाव में आया था.

सीरीज का दूसरा वनडे खेला जा रहा था की अचानक से कई दिग्गजों और न्यूज़ में रोहित के संन्यास की खबरे चलने लगी. आखिरी वनडे तक यह खबर चली की लॉर्ड्स में रोहित संन्यास लेंगे.

संन्यास पर रोहित शर्मा ने तोड़ी चुप्पी

इंग्लैंड में आखिरी मुकाबला में बेहतरीन प्रदर्शन के बावजूद टीम इंडिया को हार मिली. इस हार के बाद रोहित शर्मा ने अपना इंटरव्यू दिया जिसमे उन्होंने टीम के प्रदर्शन के साथ-साथ अपने संन्यास पर चुप्पी तोड़ी है. रोहित शर्मा ने बाहर हो रहे संन्यास के चर्चा पर बोलते हुए कहा कि,

“मेरा काम बल्ले से है, मैदान पर आओ, देश का प्रतिनिधित्व करो, टीम का प्रतिनिधित्व करो. डेब्यू के समय से मुझे यही कहा जा रहा है, इसलिए मैं यही करता रहूंगा. डेब्यू के बाद से ये लोग ये संन्यास का शोर होता था. जब तक मैं यहां रहूंगा, शोर रहेगा. इसलिए यह ज्यादा मायने नहीं रखता. जो मायने रखता है, वह है मैदान पर मेरा प्रदर्शन. टीम की सफलता में योगदान देना. अभी मेरा पूरा फोकस यही है.  बाहर क्या शोर हो रहा उसे रहने दो. अगर शोर नहीं है तो मजा कहां? मेरा काम अंदर है, उनका काम बाहर है. मैं इसे इसी तरह देखता हूं.”

शतक ठोक कर रोहित ने किया यह ऐलान

रोहित ने अपने शतक पर कहा कि,

“हां, देखिए, मुझे इंग्लैंड में खेलना बहुत पसंद है. इसमें कोई शक नहीं. माहौल, मैदान, पिचें. यहां किसी भी फॉर्मेट में खेलने आते हो तो यह आपको अलग-अलग तरीकों से चुनौती देता है. और क्रिकेटर के तौर पर यही तो चाहते हो, हर समय चुनौती मिले. और हां, मैंने बीच में अच्छा समय बिताया.” सीरीज हार और टीम पर: रोहित ने माना कि कुछ मैचों में बल्लेबाजी में रन थोड़े कम रह गए. गेंदबाजी में युवा खिलाड़ियों को समय देने की जरूरत बताई और आगे बेहतर करने के लिए इस अनुभव से सीखने पर जोर दिया.”

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