Suryakumar Yadav: भारत बनाम वेस्टइंडीज के बीच ‘करो या मरो’ का मुकाबला में भारत ने 5 विकेट से मैच जीत कर सेमीफाइनल में एंट्री मार ली है. भारत के तरफ से इस मैच में एक बार फिर अभिषेक शर्मा का बल्ला नहीं चला ईशान किशन भी कुछ खास नहीं कर सके. लेकिन संजू सैमसन ने बेहतरीन पारी खेल कर नाबाद 97 रन बनाया. सेमीफाइनल में भारतीय टीम ने जीत लिया. इस जीत के बाद भारतीय टीम कप्तान सूर्यकुमार यादव (Suryakumar Yadav) ने इस मैच के बाद जीत पर अपना बयान दिया है. आइये जानते है उनकी कप्तानी में सेमीफाइनल में पहुँचने पर क्या बयान दिया है.
कप्तान सूर्यकुमार यादव (Suryakumar Yadav) ने अपना बयान दिया
भारतीय टीम के कप्तान सूर्या (Suryakumar Yadav) ने इस मैच में बड़ी पारी नहीं खेल सके. लेकिन संजू के साथ एक छोटी साझेदारी जरुर किये. लेकिन उनके लिए संजू सैमसन उनके मैच विनार खिलाड़ी बने. कप्तान सूर्या ने कहा कि,
“ज़ाहिर है, यह बहुत अच्छा एहसास है, और जिस तरह से हमने खेला, मुझे लगता है, जैसा कि सभी ने कहा, यह करो या मरो का मैच था, क्वार्टर फाइनल जैसा. लड़कों ने जिस तरह का जज्बा दिखाया, मुझे लगता है कि यह बहुत अच्छी बात थी.
(संजू सैमसन के बारे में) देखिए, मैं हमेशा कहता हूं, अच्छे लोगों के साथ अच्छी चीजें होती हैं जो इंतजार करते हैं, जो बहुत धैर्य रखते हैं. मैंने अभी उनसे मिलने पर भी यही कहा था. लेकिन यह सब उनकी कड़ी मेहनत का नतीजा है, जो उन्होंने पर्दे के पीछे तब की जब वह खेल नहीं रहे थे, और उन्हें उसका फल सही समय पर मिला. और जिस तरह से उन्होंने बल्लेबाजी की, उन्होंने टीम को पूरी तरह से जीत की ओर ले गए.
गेंदबाजो के प्रदर्शन कप्तान सूर्या (Suryakumar Yadav) ने कहा
“मुझे लगता है कि सभी ने योजना के अनुसार गेंदबाजी की. हम जानते थे कि ओस और दूसरी पारी में विकेट की स्थिति को देखते हुए, ईडन गार्डन में 200 रन का पीछा करना हमेशा अच्छा स्कोर होता है, गेंद बल्ले पर अच्छी तरह से आती है. और जिस तरह से बल्लेबाजों ने बाद में छोटी-छोटी साझेदारियों के साथ जवाब दिया, मुझे लगता है कि यही मैच को अंत तक ले जाने की कुंजी थी.”
सेमीफाइनल मुकाबले के बारे में कप्तान Suryakumar Yadav ने कहा कि,
“वहां पहुंचकर बहुत खुश हूं. जिस तरह से हमने खेला, मुझे लगता है कि पहले मैच से ही हम सेमीफाइनल में पहुंचने के हकदार थे. वो भी मुंबई में, लेकिन अभी हम इसके बारे में नहीं सोचेंगे. आराम करो, कल फ्लाइट लो. मुंबई पहुंचने के बाद ही सोचेंगे.”
आप एक अरब लोगों की उम्मीदों को कैसे संभालते हैं?
देखिए, उम्मीदें तो हमेशा रहेंगी, लेकिन साथ ही आपको यह भी पता होना चाहिए कि एक टीम के रूप में मैदान पर आपको क्या करना है.और मैंने लड़कों से भी यही कहा. हां, दबाव तो होगा ही, मैदान पर आने वाले और घर पर बैठकर देखने वाले बहुत से लोगों की उम्मीदें होंगी. लेकिन साथ ही, जब इस तरह का मैच आता है, तो आपको और भी साहसी होना पड़ता है, आपको अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होता है, पूरी ताकत लगानी होती है, सकारात्मक रहना होता है, दबाव में भी हर स्थिति में सकारात्मक रुख अपनाना होता है. और मुझे लगता है कि हमने इसे बखूबी निभाया.
(क्या दबाव एक सौभाग्य है?) बिल्कुल. मेरा मतलब है, जहां दबाव नहीं होता, वहां मजा भी नहीं आता. और हम इस बात से मुंह नहीं मोड़ सकते कि दबाव नहीं है. दबाव तो है, हम घबराए हुए हैं. पेट में गुदगुदी हो रही है. लेकिन फिर भी, हम भारत में खेल रहे हैं, घरेलू टीम अपने घरेलू मैदान पर खेल रही है. दबाव तो होगा ही, लेकिन फिर यह ज्यादा महत्वपूर्ण है कि आप इसे कैसे समझते हैं, कैसे लेते हैं.
ALSO READ:Sanju Samson ने गंभीर को नजरअंदाज कर इन 2 खिलाड़ी को दिया अपने सफलता का श्रेय, कहा- ‘उन्ही से सीखा…’
