गॉल में श्रीलंका के खिलाफ चल रहे पहले टेस्ट मैच के दौरान ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा का दर्द पहली बार सामने आया है. उन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों की बातें साझा कीं. ब्रॉडकास्टर से बात करते हुए जडेजा ने बताया कि कैसे भारतीय टीम में निचले क्रम पर बल्लेबाजी करने से उनका आत्मविश्वास डगमगा गया था. बता दें, रवींद्र जडेजा भारत के बेहतरीन ऑलराउंडर इ से एक माने जाते है वह मौजूदा समय में उन्हें वनडे से बाहर कर दिया गया है. अब उनके पास टेस्ट का फ़ॉर्मेट ही बचा है. ऐसे में आज उन्होंने बात करते हुए कई खुलासे किये .
रवींद्र जडेजा का छलका दर्द, कहा- अश्विन के बाद भेजते थे
रवींद्र जडेजा ने बताया वह नंबर 4 पर बल्लेबाजी करते थे और बेहतरीन औसत था जडेजा का मानना है कि भारतीय टीम मैनेजमेंट को उनके ऊपर भरोसा नहीं था और इसी वजह से उन्हें उस नंबर पर बल्लेबाजी के लिए नहीं भेजा गया.
रवींद्र जडेजा ने कहा, “रणजी ट्रॉफी और घरेलू क्रिकेट में मेरा बल्लेबाजी औसत 60 से ज्यादा रहा है. मैं नंबर 4 पर खेलता था और मुझे अपनी क्षमता पर पूरा भरोसा था. लेकिन जब मैं भारतीय टीम में आया तो मुझे वह बल्लेबाजी क्रम नहीं मिला. कई बार मुझे नंबर 8 या 9 पर भेजा गया. कभी-कभी आर. अश्विन के बाद भी बल्लेबाजी के लिए जाना पड़ता था.”
टीम को मेरे ऊपर भरोसा ही नहीं था
उन्होंने आगे बताया कि ड्रेसिंग रूम का माहौल भी उनके मनोबल को प्रभावित करता था. “पैड पहनकर बैठे होते थे और बगल में तेज गेंदबाज अगली पारी के लिए गेंद चुन रहा होता था. लगता था कि अब गेंदबाजी शुरू होने वाली है. ऐसे में मन में आता था कि ये क्या है? टीम को मुझ पर भरोसा ही नहीं है. मेरा कॉन्फिडेंस सचमुच डगमगा गया था”
जडेजा भारतीय टीम के अहम सदस्य हैं. गॉल टेस्ट में भी वे टीम का हिस्सा हैं. उनके इस खुलासे से पुरानी चयन नीति और बल्लेबाजी क्रम की प्राथमिकताओं पर चर्चा छिड़ गई है.
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